संवेग स्थाई भाव और चरित्र

संवेग संपूर्ण जीवन का तीव्र उपद्रव है तथा यह एक मानसिक अवस्था है। यह एकदम से उत्पन्न होती है, जिसमें अनुभूति और गत्यात्मक तत्परता होती है। इसके अंतर्गत मनुष्य के व्यवहार और निर्णय दोनों ही प्रभावित होते हैं; यह व्यक्ति की आंतरिक संरचना से निर्देशित अनुभव और क्रिया है। यह क्रिया और अनुभव आते हैं और चले जाते हैं तथा कुछ समय के लिए व्यक्ति को स्तब्ध कर जाते हैं।

संवेग सर्वदा अस्थायी होते हैं; यह जल्दी आते हैं और कुछ समय बाद शांत हो जाते हैं, जैसे — हर्ष, क्रोध, भय, दु:ख आदि।

इसका एक जीवंत उदाहरण यह है कि एक व्यक्ति रात को बहुत खुश होकर सोया था क्योंकि उसे अगले दिन पिकनिक पर जाना था। लेकिन सुबह जब वह जागा, तो उसे ऐसा महसूस हुआ मानो उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया हो, शरीर असहाय हो गया हो और सिर इस प्रकार घूम रहा हो जैसे उठते ही गिर जाएगा। वह इतना भयभीत हो गया मानो उसकी मृत्यु सामने खड़ी हो।

किन्तु सकारात्मक वातावरण व्यक्ति को ऐसी परिस्थितियों पर विजय पाने की शक्ति देता है। सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन के कारण व्यक्ति उस स्थिति से बाहर निकलने में सक्षम हो जाता है।

स्थायी भाव (Permanent Emotion)

स्थायी भाव वे भाव होते हैं जो हृदय में गहराई से स्थापित हो जाते हैं और जीवनभर हमारे भीतर बने रहते हैं। ये हमारी प्रकृति का हिस्सा बन जाते हैं तथा हमारे सोचने, समझने और कार्य करने की दिशा निर्धारित करते हैं।

प्रेम, देशभक्ति, श्रद्धा, करुणा आदि स्थायी भावों के प्रमुख उदाहरण हैं। बार-बार किसी विशेष अनुभव या भावना का उद्भव धीरे-धीरे हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाता है और वही आगे चलकर स्थायी भाव का रूप ले लेता है।

संवेग_स्थाई_भाव_और_चरित्र

स्थायी भाव और चरित्र

चरित्र वास्तव में स्थायी भावों का संगठन होता है। इसमें अनेक भाव सम्मिलित होते हैं, किन्तु उनमें से कोई एक प्रमुख भाव व्यक्ति के सोच-विचार और व्यवहार को दिशा देता है।

यदि स्थायी भावों में कोई समन्वय न हो और कोई प्रमुख भाव उनका संचालन न करे, तो मनोवैज्ञानिक दृष्टि से व्यक्ति का चरित्र अस्थिर माना जाता है। नैतिक दृष्टि से भी यदि किसी का प्रधान भाव श्रेष्ठ है, तो उसका चरित्र श्रेष्ठ माना जाएगा; और यदि वह निम्न स्तर का है, तो चरित्र भी उसी के अनुरूप आंका जाएगा।

सकारात्मक वातावरण का महत्व

एक सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों के चरित्र, सोच और आत्मविश्वास के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा वातावरण विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को समझने, सही स्थायी भाव विकसित करने और मजबूत व्यक्तित्व निर्माण में सहायता प्रदान करता है।

इसी प्रकार का वातावरण विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। बियानी कॉलेज एक ऐसी जगह है, जहां बच्चों का चरित्र, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास निखरता है। यहां का माहौल इन सब चीज़ों के लिए बेहतरीन है, जिससे यहां के छात्र और शिक्षक, दोनों ही खुद को बेहतर बना पाते हैं। यही कारण है कि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी अपनी भावनाओं को समझकर, अच्छे स्थायी भाव चुनते हैं और खुद का चरित्र सुदृढ़ बनाते हैं। कॉलेज उन्हें आगे बढ़ने के लिए अच्छा माहौल और सही रास्ता देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. सकारात्मक ऊर्जा के कारण हम किन पर काबू पा सकते हैं ?

उत्तर: सकारात्मक ऊर्जा से प्रत्येक स्थिति पर काबू किया जा सकता है।

प्रश्न 2. संवेगों के द्वारा मनुष्य का क्या प्रभावित होता है ?

उत्तर: संवेग के द्वारा मनुष्य का व्यवहार और निर्णय दोनों प्रभावित होते हैं।

प्रश्न 3. स्थाई भाव कहां स्थित होते हैं ?

उत्तर: स्थाई भाव मनुष्य के अंदर स्थित होते हैं।


ब्लॉग लेखन
डॉ. सुनीता कुमारी शर्मा
सहायक प्राध्यापक, शिक्षा विभाग
बियानी गर्ल्स बी.एड. कॉलेज, जयपुर

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