भारत में क्षेत्रीय संगति क्षेत्रवाद अथवा प्रदेशिकता की समस्या के रूप में उभर कर सामने आती है। संगति भारत के कार्य राष्ट्र निर्माण में अवरोध तत्व है; क्षेत्रवाद इसका रूप है जो अपने क्षेत्र या राज्य की प्रतिनिधिकी संकीर्ण भावना है; इन क्षेत्रों के लोग अपने प्रति उपेक्षा महसूस करते हैं। भारत सरकार का प्रमुख उद्देश्य सांस्कृतिक, धार्मिक, तथा प्रजातीय अनेकताएँ एवं संघर्ष होते हुए भी एकता की भावना का विकास करना है।
आर्थिक असमानताओं को जब राजनीतिक उद्देश्य के लिए शोषण किया जाता है तो क्षेत्रवाद की समस्या उत्पन्न हो जाती है तथा क्षेत्रीय संगठन जन्म लेने लगते हैं। क्षेत्रवाद जैसी समस्या जन्म एवं विकास के लिए क्षेत्रीय विभिन्नता, भाषायी लगाव, विभिन्न क्षेत्रों का असंतुलित आर्थिक विकास, सामाजिक अन्याय तथा पिछड़ापन, धार्मिक संकीर्णता, निहित स्वार्थ आदि उत्तरदाई होते हैं।
भारत विविधताओं का देश है और यहां पर प्रत्येक प्रांत और क्षेत्र की अपनी विशिष्ट विशेषता है। इन तथ्यों के बावजूद, अनेक विशेषताएं समय के साथ रूढ़ियों में परिवर्तित हो गई हैं। यद्यपि इनका अपना कोई तर्कसंगत आधार नहीं है, इन रूढ़ियों को औपनिवेशिक काल में अत्यधिक मजबूती मिली क्योंकि अंग्रेजों ने अपने स्वार्थ के लिए इन्हें वर्ग विशेष से जोड़ दिया।
रूढ़ियां समाज में अपना विशिष्ट प्रभाव डालती है। यदि इन्हें सकारात्मक रूप में लिया जाता है और नकारात्मक तत्वों को छोड़ दिया जाता है तो इससे उसे वर्ग एवं समाज का विकास होता है। परंतु यदि इनके नकारात्मक तत्वों को उभार दिया जाता है तो उससे समाज में बिखराव, तोड़फोड़ एवं उपद्रव की घटनाओं में वृद्धि होने लगती है।
यद्यपि इन रूढ़ियों को समाप्त करना सरल कार्य नहीं है क्योंकि भारत जैसे देश में इतनी अधिक समूह एवं संप्रदाय हैं कि उन सबका विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त सभी तक शिक्षा को पहुंचाकर उनकी नकारात्मकता को कम किया जा सकता है।
जब यह तत्व एक साथ समाहित रहते हैं तो देश की सुरक्षा एवं स्थायित्व पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है परंतु यदि यह समूह अपनी स्वयं की पहचान के लिए संघर्ष करने लगते हैं तो उससे स्थितियां बिगड़ने लगती हैं और देश का विकास प्रभावित होता है।
क्षेत्र से संबंधित रूढ़ियों एवं पूर्वाग्रहों के कारण एवं प्रभाव
भारत विविधताओं का देश है, और यहां पर प्रत्येक प्रांत और क्षेत्र की अपनी विशिष्ट विशेषता है। इन तत्वों के बावजूद, अनेक विशेषताएं समय के साथ रूढ़ियों में परिवर्तित हो गई हैं। इनका अपना कोई तर्कसंगत आधार नहीं है। इन रूढ़ियों को औपनिवेशिक काल में अत्यधिक मजबूती मिली क्योंकि अंग्रेजों ने अपने स्वार्थ के लिए इन्हें वर्ग विशेष से जोड़ दिया।
हिंदू धर्म ने भी इन रूढ़ियों के विकास एवं प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई क्योंकि हिंदू धर्म ने वैदिक काल के पश्चात निरंतर भेदभाव एवं असमानता को महत्व दिया। यद्यपि समय-समय पर इनका विरोध भी हुआ तथा नवीन संप्रदायों एवं धर्मों का उदय भी हुआ, जैसे अजीवक संप्रदाय, जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म।
इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए हम देश के दो राज्यों पंजाब एवं केरल का उदाहरण ले सकते हैं।
पंजाब
पंजाब राज्य के निवासियों के बारे में सामान्य भारतीयों में कई धारणाएं व्याप्त हैं, यद्यपि इनमें से कुछ उचित है तथा कुछ का कोई आधार नहीं है। इनकी उत्पत्ति का कारण धार्मिक एवं ऐतिहासिक है। यह रूढ़ियाँ निम्न हैं:
- सभी पंजाबी बहादुर एवं साहसी होते हैं।
- सभी पंजाबी अत्यधिक तेज आवाज में बातें करते हैं।
- सभी पंजाबी शिक्षा पर अत्यधिक विचार नहीं करते हैं।
केरल
केरल भारत का सर्वाधिक साक्षर राज्य है तथा उनका लिंगानुपात देश में सर्वाधिक है। इन तत्वों के अतिरिक्त केरल राज्य के प्रति भी लोगों के मन में कुछ रूढ़ियाँ हैं, जो निम्न हैं:
- केरल के निवासी लोगों का स्वागत बहुत ही अच्छे तरीके से करते हैं।
- हिंदू, मुस्लिम, एवं ईसाई की आबादी में एक अच्छा संतुलन है।
- केरल के लोग स्वच्छता पर अधिक ध्यान देते हैं।
इसके अतिरिक्त सभी तक शिक्षा को पहुंचा कर इनकी नकारात्मकता को कम किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त सभी तक शिक्षा को पहुंचाकर उनकी नकारात्मकता को कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।
जब भी ये तत्व एक साथ समाहित रहते हैं तो देश की सुरक्षा एवं स्थायित्व पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है, परंतु यदि यह समूह अपनी स्वपहचान के लिए संघर्ष करने लगते हैं तो उससे स्थितियां बिगड़ने लगती है और देश का विकास प्रभावित होता है।
क्षेत्रीय रूढ़िवादिता को समाप्त करने के लिए प्रयास
- सरकार को विकास कार्यक्रमों का निर्माण और उनका क्रियान्वयन कुछ इस प्रकार करना चाहिए कि संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिले।
- विशिष्ट जातीय समुदाय की अपनी विशिष्ट संस्कृति और पहचान को सुनिश्चित रखने के लिए सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
- जहां तक संभव हो पिछड़े हुए क्षेत्रों के आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
- क्षेत्रवाद को समाप्त करने के लिए विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक करवाने चाहिए।
- शिक्षक को चाहिए कि वह स्वयं भी और विद्यार्थियों को भी मानवतावाद का पाठ पढ़ाये।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत सरकार का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
उत्तर:धार्मिक सांस्कृतिक संघर्ष होते हुए एकता की भावना का विकास करना।
प्रश्न 2. क्षेत्रवाद को कैसे समाप्त किया जा सकता है?
उत्तर:विद्यार्थियों को मानवता का पाठ पढ़ाकर कर और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से।
प्रश्न 3. भारत में पूर्वाग्रह का कारण क्या है?
उत्तर:भेदभाव एवं असमानता।
ब्लॉग लेखन :
श्रीमती मुकेश कुमारी
सहायक प्राध्यापक, शिक्षा विभाग
बियानी गर्ल्स बी.एड. कॉलेज, जयपुर