भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के संदर्भ में जैन दर्शन और शिक्षा
भारत की ज्ञान परंपरा सदियों से केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने मानव के चरित्र, जीवन-मूल्य और आत्मिक उत्थान पर भी बल दिया। इसी क्रम में जैन
भारत की ज्ञान परंपरा सदियों से केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने मानव के चरित्र, जीवन-मूल्य और आत्मिक उत्थान पर भी बल दिया। इसी क्रम में जैन
अवलोकन व्यक्ति के व्यवहार के मापन की अत्यन्त प्रचीन विधि है। व्यक्ति अपने आस-पास घटित होने वाली क्रियाओं तथा घटनाओं का अवलोकन करते रहते हैं। मापन के एक उदाहरण के
Education is the foundation of every successful society, and in today’s rapidly changing world, the relevance of commerce education has grown more than ever. Commerce is one of the most
परिचय: संस्कृति से आशय मानव द्वारा निर्मित समस्त प्रकार के भौतिक एवं आध्यात्मिक या अभौतिक तत्त्वों से है। Lag का हिन्दी अर्थ ‘लंगड़ाना’ या ‘विडम्बना’ होता है। जिसका अर्थ है
परिचय : आज के तीव्र गति से बदलते हुए युग में नेतृत्व (Leadership) और प्रबंधन (Management) का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। समाज, शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति या
परिचय: भारतीय समाज में प्राचीन समय में वर्ण व्यवस्था समाज की रीढ़ थी । जाति का आधार मनुष्य का जन्म न होकर उसकी योग्यता तथा पेशा था । परन्तु कालान्तर
परिचय आज के तेजी से बदलते युग में शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास का माध्यम बन चुकी है। ऐसे में मानसिक
परिचय: वह आंतरिक कारक या दशा जिसमें क्रिया को आरंभ करने से लेकर उसे बनाए रखने की प्रवृति होती है जो जब तक जारी रहती है जब तक लक्ष्य की
भूमिका: आज की डिजिटल दुनिया में शिक्षा केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रही है। तकनीकी प्रगति ने शिक्षण की पारंपरिक परिभाषा को बदल दिया है। इन्हीं तकनीकों में
प्रस्तावना शिक्षा मानव जीवन का मूल स्तंभ है, जो व्यक्ति के संपूर्ण विकास में सहायक होती है। समय के साथ-साथ जैसे- जैसे समाज में परिवर्तन होते गए, वैसे-वैसे शिक्षण के
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