“शिक्षा से परिवर्तन संभव है, परंतु एक अच्छा शिक्षक सब कुछ परिवर्तित कर सकता है।”
उपरोक्त पंक्तियां शिक्षकों पर पूर्णतया सटीक है क्योंकि शिक्षक ही समाज निर्माण व समाज परिवर्तन की आधारशिला है तथा परिवर्तित समाज को सही दिशा प्रदान करने का कार्य शिक्षक का है। अतः समाज को ऐसे सुप्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता है जो विकसित समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके। एक ऐसा शिक्षक जो अंधेरे में रास्ता ढूंढ रहे बालक को स्वयं दीपक बनकर रास्ता दिखाएं—वह रास्ता जो बुद्धि, उम्मीद व मूल्यों से भरा हुआ हो।
सुप्रशिक्षित शिक्षक के निर्माण में B.Ed. पाठ्यक्रम की क्या भूमिका है? इस सवाल का जवाब इस कहानी में छुपा हुआ है।
दो व्यक्तियों को मार्बल के पत्थर दिए गए जो खुरदरे व गंदे थे। पहले व्यक्ति ने सोचा कि इसका कुछ नहीं हो सकता, उसने वह पत्थर फेंक दिया। परंतु दूसरे व्यक्ति ने सोचा कि यह कितना भी खराब है, इसका कुछ ना कुछ अच्छा बन ही सकता है। उसने धैर्यपूर्वक उस पत्थर पर काम करना शुरू किया। काम के दौरान उसे कभी गुस्सा आया, कभी निराशा हुई, पर अंत में एक सुंदर मूर्ति तैयार हो गई।
पहले व्यक्ति के पास पत्थर ही रह गया और दूसरे के पास एक सुंदर मूर्ति। विद्यार्थी भी इसी प्रकार मार्बल के पत्थर जैसे होते हैं—रफ और अनपॉलिश्ड। उन्हें त्यागने के बजाय तराशने की आवश्यकता होती है। यह कार्य एक प्रशिक्षित शिक्षक ही कर सकता है। इस कहानी से स्पष्ट है कि B.Ed. पाठ्यक्रम शिक्षक को वह कौशल और धैर्य प्रदान करता है जिससे वह बालक को एक सुंदर व्यक्तित्व में ढाल सके।
B.Ed. पाठ्यक्रम के मुख्य उद्देश्य है-
1. बाल मनोविज्ञान की समझ विकसित करना –
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्राध्यापक में यह क्षमता विकसित की जाती है कि वह बालक के व्यवहार के कारणों को समझकर उनका समाधान कर सके।
2. शिक्षण कौशलों का विकास करना –
शिक्षण कौशल वे प्रक्रियाएं हैं जिन्हें शिक्षक कक्षा में अपने शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए उपयोग करता है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विभिन्न कौशल सिखाए जाते हैं जैसे प्रस्तावना कौशल, श्यामपट्ट कौशल, प्रश्न कौशल, व्याख्यान कौशल और पुनर्बलन कौशल आदि।
3. शिक्षण में तकनीकी का प्रयोग –
वर्तमान तकनीकी युग में शिक्षण को प्रभावशाली बनाने हेतु विभिन्न तकनीकों का उपयोग सिखाया जाता है।
4. सामाजिक उत्तरदायित्व एवं मूल्य विकास –
B.Ed. पाठ्यक्रम के दौरान सामाजिक, नैतिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरणीय मूल्यों का विकास किया जाता है जिससे शिक्षक समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार कर सके।
5. संप्रेषण कौशलों का विकास –
शिक्षण प्रक्रिया एक संप्रेषण प्रक्रिया है। इसमें पढ़ना, लिखना, बोलना और सुनना जैसे कौशल विकसित किए जाते हैं।
इसके अतिरिक्त समय प्रबंधन, क्रियात्मक अनुसंधान, तनाव प्रबंधन एवं शिक्षा दर्शन जैसे विषय भी सिखाए जाते हैं।
बियानी गर्ल्स बी.एड. कॉलेज श्रेष्ठ शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है जहां सामाजिक उत्तरदायित्व, शिक्षण कौशल और मूल्यों से युक्त भावी शिक्षकों का निर्माण किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1. B.Ed. पाठ्यक्रम में एडमिशन कैसे होता है?
उत्तर: B.Ed पाठ्यक्रम में एडमिशन पीटीईटी के माध्यम से होता है।
प्रश्न 2. बियानी गर्ल्स B.Ed कॉलेज किससे एफिलिएटेड है?
उत्तर: यह राजस्थान यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड है।
प्रश्न 3. B.Ed पाठ्यक्रम कितने साल का है?
उत्तर: यह 2 वर्ष का पाठ्यक्रम है जिसमें 4 सेमेस्टर होते हैं।
ब्लॉग लेखन :
डॉ. आरती गुप्ता
सहायक प्राध्यापक, शिक्षा विभाग
बियानी गर्ल्स बी.एड. कॉलेज, जयपुर