“कुछ ऐसी कर कोशिश की जो चाहे तुझको मिल सके और जो ना मिल सके उसे छीन ले तकदीर से” यह बात हमारे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया राजे के द्वारा उद्धृत है वर्तमान समय में महिलाओं की भूमिका में बड़ा बदलाव आया। आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम गढ़ संकल्प से भाग्य में लिखा हुआ भी बदला जा सकता है। सार रूप में देखे तो हमने जो कर्म प्राप्त किए हैं वही हमारा भाग्य विधाता है। आत्मविश्वास एक ऐसा मार्ग है जिस व्यक्ति अपनी क्षमताओं को पहचान के दृढ़ निश्चय करके अपने आत्म संयम को दूर करता है। स्वयं के विश्वास से हम अपने अंदर सकारात्मक का संचार करते हैं और सकारात्मक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं जो कर्मों में परिवर्तन लाकर इंसान अपना भविष्य बदल सकता है वर्तमान में कर्म ही हमारे भाग्य निर्माता है।
आज के समय में कर्म ही हमारे भाग्य के निर्माता हैं और आत्मविश्वास तथा कठोर परिश्रम वह सबसे महत्वपूर्ण उपकरण हैं, जिनके सहारे कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है। यही कारण है कि एक अच्छे शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में भी विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया जाता है, ताकि वे अपने जीवन में निरंतर प्रगति कर सकें और समाज के लिए प्रेरणा बनें।
आत्मविश्वास का महत्व
संसार ऐसे व्यक्तित्व की ही प्रशंसा करता है जो अपने आप में विश्वास रखता है जिन व्यक्तियों के मुख पर दृढ़ संकल्प झलकता है। उनकी इच्छा शक्ति लोह पुरुष के समान होती है वह अपने जीवन का आधा युद्ध जीत लेते हैं जिनमें आत्मविश्वास की भावना प्रबल होती है। आत्मविश्वास से व्यक्ति कम विद्वता होने के कारण भी वह विद्वान महापुरुष जिसकी कम विद्वता पर आत्मविश्वास अधिक है उससे अधिक सफल हो जाता है। उस व्यक्ति को हरापाना मुश्किल होता है जो भाग्य में ईश्वर की इच्छा समझकर कार्य करने लग जाते हैं निश्चित रूप से ऐसे व्यक्ति अपने कर्मों के माध्यम से विश्व विजेता का लक्ष्य रखते हैं।
कठिन परिश्रम की आवश्यकता
जिन लोगों में आत्मविश्वास की कमी होती है वह छोटी-छोटी कठिनाइयों से भी डर जाते हैं। वह अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं लक्ष्य को बनाए रखने के लिए तथा उत्तर पहुंचने के लिए मेहनत की आवश्यकता अवश्य होगी। इसके लिए इस तरह तपना होगा जैसे लोहे की भट्टी में लोहा तपता है तपा हुआ लोहा ही एक आकार में आकर बड़े-बड़े औद्योगिक क्षेत्र में मशीनरी के रूप में काम आता है इसलिए परिश्रम का कोई भी विकल्प नहीं होता है। ऐसी ही एक संस्थान विद्याधर नगर में बियानी गर्ल्स कॉलेज है जो इसी तरह बच्चों को कठिन परिश्रम करना सीखना है उन बच्चों को वह आकार देता है जिस आकार की वर्तमान में आवश्यकता है।
वर्तमान जीवन में इसकी प्रासंगिकता
आज वर्तमान की इस वैश्विक दौर में जहां कदम कदम पर प्रतिस्पर्धा व्याप्त है। वहा कर्म रूपी भाग्य की अत्यंत आवश्यकता है। वर्तमान में इस समय में जहां भी शिक्षा रोजगार या किसी भी प्रकार का व्यवसाय हो उसमें बिना आत्मविश्वास में कठिन परिश्रम के कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है। जो विद्यार्थी आत्मविश्वास में कठोर परिश्रम के साथ पढ़ाई करते हैं नियंत्रण रखते हैं वह व्यक्ति निश्चित रूप से इस युग में सफल होंगे व्यक्ति इन दोनों गुणो के साथ ही आज आगे बढ़ सकता है। इस प्रकार लोगों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होना जरूरी है ताकि वह अपना सर्वस्व न्योछावर करके अपने जीवन में प्रकृति कर सके।
निष्कर्ष
अतः कहा जा सकता है कि मनुष्य का जीवन भाग्य भरोसे नहीं चल सकता है व्यक्ति को आत्मविश्वास व कठिन परिश्रम के साथ मेहनत भी करनी पड़ती है यही वह शक्तियां है जो व्यक्ति को उसके लक्ष्य तक पहुंचती है।
महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
Q.1. क्या केवल आत्मविश्वास से सफलता प्राप्त की जा सकती है?
उत्तर: नहीं, केवल आत्मविश्वास पर्याप्त नहीं है। आत्मविश्वास के साथ-साथ कठिन परिश्रम, सही दिशा और निरंतर प्रयास भी आवश्यक होते हैं। आत्मविश्वास हमें आगे बढ़ने की शक्ति देता है, जबकि परिश्रम हमें लक्ष्य तक पहुँचाता है।
Q.2. कठिन परिश्रम का जीवन में क्या महत्व है?
उत्तर: कठिन परिश्रम सफलता की कुंजी है। यह व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य और अनुभव प्रदान करता है। परिश्रम से व्यक्ति अपनी कमजोरियों को सुधार सकता है और अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकता है।
Q.3. क्या सच में भाग्य को बदला जा सकता है?
उत्तर: हाँ, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत के बल पर व्यक्ति अपने जीवन की परिस्थितियों को बदल सकता है।
ब्लॉग लेखन :
विनीता शर्मा
सहायक आचार्य, शिक्षा विभाग
बियानी गर्ल्स बी.एड. कॉलेज, जयपुर