ब्लेंडेड टीचिंग(Blended Teaching) क्या है?

प्रस्तावना

शिक्षा मानव जीवन का मूल स्तंभ है, जो व्यक्ति के संपूर्ण विकास में सहायक होती है। समय के साथ-साथ जैसे- जैसे समाज में परिवर्तन होते गए, वैसे-वैसे शिक्षण के तरीके भी विकसित होते गए। आज, जब पूरी दुनिया तकनीकी प्रगति की दिशा में तेज़ी से बढ़ रही है, शिक्षा भी परंपरागत तरीकों से निकलकर नए रूपों में सामने आ रही है। इन्हीं नवाचारों में से एक है – ब्लेंडेड टीचिंग (Blended Teaching)। ब्लेंडेड टीचिंग एक ऐसा शिक्षण मॉडल है जो परंपरागत कक्षा शिक्षण और ऑनलाइन शिक्षण को एक साथ जोड़ता है। यह शिक्षण पद्धति न केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों को अधिक लचीलापन प्रदान करती है, बल्कि शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक और व्यक्तिगत भी बनाती है।

ब्लेंडेड टीचिंग क्या है?

ब्लेंडेड टीचिंग का शाब्दिक अर्थ है – मिश्रित शिक्षण, यानी ऐसा शिक्षण जिसमें दो या अधिक माध्यमों का सम्मिलन हो। इसमें पारंपरिक कक्षा (classroom teaching) और डिजिटल तकनीक (online tools) का संयोजन होता है। इसमें शिक्षक कुछ विषय या अवधारणाएं कक्षा में पढ़ाते हैं, जबकि अन्य विषय या हिस्से छात्रों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे गूगल क्लासरूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, यूट्यूब, लर्निंग ऐप्स आदि के माध्यम से सिखाए जाते हैं। इस तरीके में छात्र अपनी गति से और अपनी सुविधानुसार सीख सकते हैं, जिससे उनके सीखने की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

ब्लेंडेड टीचिंग के प्रकार

  1. फ्लिप्ड क्लासरूम (Flipped Classroom): छात्र घर पर वीडियो या सामग्री देखकर तैयारी करते हैं, और कक्षा में चर्चा, प्रश्नोत्तर या अभ्यास होता है।
  2. रोटेशन मॉडल (Rotation Model): छात्र समयानुसार पारंपरिक और ऑनलाइन शिक्षण के बीच अदल-बदल करते हैं।
  3. फ्लेक्स मॉडल (Flex Model): अधिकांश शिक्षण ऑनलाइन होता है, और शिक्षक सहायक की भूमिका में होते हैं।
  4. ऑनलाइन-ड्राइवेन मॉडल: जहां मुख्य रूप से शिक्षा ऑनलाइन होती है, लेकिन आवश्यकतानुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी मिलता है।

ब्लेंडेड टीचिंग की आवश्यकता क्यों?

भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश में शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियाँ हैं – जैसे गुणवत्ता, पहुंच, संसाधनों की कमी, और डिजिटल अंतर। ब्लेंडेड टीचिंग इन सभी समस्याओं का समाधान देने में सक्षम है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्ता युक्त शिक्षकों की कमी को तकनीक के माध्यम से दूर किया जा सकता है।
  • छात्रों को सीखने का स्वायत्त अनुभव प्राप्त होता है।
  • शिक्षक भी समय और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं।

ब्लेंडेड टीचिंग के लाभ

  1. व्यक्तिगत अधिगम (Personalized Learning): हर छात्र की सीखने की गति और शैली अलग होती है। ब्लेंडेड टीचिंग छात्रों को अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार सीखने का अवसर देती है।
  2. तकनीकी साक्षरता में वृद्धि: छात्रों और शिक्षकों दोनों की डिजिटल दक्षता बढ़ती है, जो 21वीं सदी की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
  3. शिक्षण में नवाचार: वीडियो, क्विज़, इंटरएक्टिव गेम्स, एनिमेशन, वर्चुअल रियलिटी आदि के उपयोग से रुचि और समझ में वृद्धि होती है।
  4. समय और स्थान की स्वतंत्रता: छात्र कभी भी, कहीं से भी पढ़ सकते हैं।
  5. फीडबैक और मूल्यांकन आसान: ऑनलाइन टेस्टिंग और डेटा एनालिटिक्स से छात्रों की प्रगति को मापा जा सकता है।

ब्लेंडेड टीचिंग की चुनौतियाँ

  1. डिजिटल डिवाइड: हर छात्र के पास स्मार्टफोन, लैपटॉप या इंटरनेट की सुविधा नहीं होती, विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में।
  2. शिक्षकों का प्रशिक्षण: सभी शिक्षक तकनीकी रूप से सशक्त नहीं होते। उन्हें नए उपकरणों और तरीकों का प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
  3. अनुशासन की समस्या: ऑनलाइन शिक्षण में छात्र अनुशासन और ध्यान केंद्रित करने में चूक सकते हैं।
  4. समय प्रबंधन: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों को संतुलित करना कठिन हो सकता है।
  5. सामाजिक संबंधों में कमी: वास्तविक कक्षा में जो जुड़ाव होता है, वह ऑनलाइन में कम हो सकता है।

कोविड-19 और ब्लेंडेड टीचिंग

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की शिक्षा प्रणाली को झकझोर कर रख दिया। स्कूल और कॉलेज बंद हो गए, लेकिन शिक्षा का प्रवाह बंद नहीं हुआ। इस स्थिति में ब्लेंडेड टीचिंग एक जीवनरेखा के रूप में सामने आई। शिक्षकों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया, छात्रों ने डिजिटल माध्यमों से सीखना शुरू किया। कोविड के बाद भी यह मॉडल तेजी से अपनाया जा रहा है और यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली ब्लेंडेड टीचिंग पर आधारित होगी।

शिक्षकों की भूमिका में परिवर्तन

ब्लेंडेड टीचिंग में शिक्षक केवल विषय-वस्तु प्रस्तुत करने वाले नहीं रहते, बल्कि वे मार्गदर्शक, सहायक और मूल्यांकनकर्ता की भूमिका में होते हैं। उन्हें कक्षा की योजना इस तरह बनानी होती है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षण एक-दूसरे को पूरक बनें, न कि प्रतिस्पर्धी।

नीति-निर्माताओं की भूमिका

  • सभी स्कूलों को डिजिटल सुविधाओं से लैस करना चाहिए।
  • शिक्षकों को समय-समय पर तकनीकी प्रशिक्षण देना चाहिए।
  • इंटरनेट की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों तक सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • बच्चों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित करने चाहिए।

निष्कर्ष

ब्लेंडेड टीचिंग न केवल एक विकल्प है, बल्कि आज के समय की अनिवार्यता बन चुकी है। यह शिक्षण को अधिक प्रभावी, समावेशी, और परिणामदायक बनाता है। यदि इसे योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जाए, तो यह भारत की शिक्षा प्रणाली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। “ब्लेंडेड टीचिंग शिक्षा का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता है।” ✍ ब्लॉग लेखक: विनिता शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर बियानी गर्ल्स बी.एड. कॉलेज

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